तेरी आँखों में खुद को देख कर, मैं गीत गाता रहा
कभी जो चल भी पड़ा ,अपनी मंज़िल की तरफ.
तेरी कमर के उस खूबसूरत पुल पर,
मैं बस लौट के आता रहा ,जाता रहा.
मैं गीत गाता रहा.

गुलमोहर के वो पेड़ , और सुर्ख फूलों से भरी वो टहनिया
उनके नीचे बीते पल, और तेरी जुल्फों की पहेलियाँ
मैं बस अभी भी हूँ,उन्ही को हर पल सुलझाता रहा,
मैं गीत गाता रहा.
तेरी आँखों में खुद को देख कर मैं गीत गाता रहा